EPFO Pension Scheme: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े करोड़ कर्मचारियों के लिए यह अहम खबर है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को सैलरी सीमा के संशोधन पर निर्देश दिया है। इस सीमा में पिछले 11 सालों से अभी तक किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा सका है। इसको लेकर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जी. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। उच्चतम न्यायालय में इस याचिका की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं संचालित करने वाले प्रमुख संगठन ईपीएफओ की योजना में ₹15000 से अधिक की मासिक आय वाले कर्मचारियों को शामिल नहीं किया जाता है। इसको लेकर यह याचिका डाली गई थी। जिस पर उच्चतम न्यायालय ने अहम निर्देश दिया है।
सालों से सैलरी में हो रहा मनमाने ढंग से बदलाव
बता दें ईपीएफओ के कर्मचारियों की ओर से ही यह याचिका फाइल की गई थी। वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी द्वारा इन कर्मचारियों का पक्ष रखते हुए कहा गया कि देश के कई हिस्सों में न्यूनतम सैलरी इस सीमा से अधिक हो जाने के बाद भी ईपीएफ की वेतन सीमा में किसी भी तरह का कोई बदलाव आज तक नहीं किया गया है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और भविष्य निधि के लाभों से वंचित रखा जा रहा है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के अंदर आदेश की प्रति के साथ केंद्र सरकार को अपना प्रतिवेदन दें। सरकार चार महीने के भीतर इस बारे में निर्णय ले। इसके साथ साथ याचिका में यह भी कहा गया है कि पिछले 70 सालों से वेतन सीमा का पुनरीक्षण नहीं किया गया है और कभी भी यह 13 से 14 साल के अंतराल के बाद हुआ है। इस दौरान कई बड़े परिवर्तन जिसमें न्यूनतम वेतन मुद्रा स्थिति और प्रति व्यक्ति आय जैसे संकेतक शामिल हैं उनसे भी किसी तरह का कोई संबंध नहीं रखा जाता है।
कम कर्मचारी उठा रहे लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की इस असंगत नीति के कारण ईपीएफ योजना के अंतर्गत पहले की तुलना में आज बहुत कम कर्मचारी इसका फायदा उठा पा रहे हैं। वर्ष 2022 में ईपीएफओ की उप समिति द्वारा वेतन सीमा बढ़ाने और अधिक कर्मचारियों को योजना में शामिल करने की सिफारिश भी की गई थी। जिसे केंद्रीय बोर्ड द्वारा मंजूरी प्रदान की गई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया है। यह आंकड़ों के मुताबिक पिछले 70 सालों में ईपीएफ योजना की वेतन सीमा में हुए संशोधन के विश्लेषण से देखा जा सकता है कि पहले के 30 वर्षों में यह एक समावेशी रूप में व्यवस्थित थी। लेकिन बाद के 30 सालों में यह स्पष्ट रूप से कर्मचारियों को बाहर रखने का जरिया बनकर रह गई है।
आदेश से लाखों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
उच्चतम न्यायालय के इस अहम आदेश से देशभर के लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। यदि केंद्र सरकार वेतन सीमा में संशोधन पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो ₹15000 से अधिक मासिक आय वाले कर्मचारियों को भी ईपीएफ योजना के दायरे में शामिल किया जा सकेगा। इससे न केवल सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा बल्कि भविष्य निधि पेंशन और अन्य संबंधित लाभ भी अधिक कर्मचारियों तक पहुंच सकेंगे। लंबे समय से वेतन सीमा में बदलाव न होने के कारण जो कर्मचारी इन योजनाओं से वंचित थे उन्हें अब आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने के अंदर निर्णय लेने को कहा है और सरकार इस पर जल्द निर्णय ले सकती है कर्मचारियों को सरकार के अगले अपडेट का इंतजार है।
